जीवन के प्रत्येक दशक में जन्म के बाद से ही कुछ जीवनीय खास गुणों का हास होता है। - Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Friday, September 16, 2016

जीवन के प्रत्येक दशक में जन्म के बाद से ही कुछ जीवनीय खास गुणों का हास होता है।

वैसे तो जन्म होते ही प्रति क्षण जीवन में परिवर्तन होता रहता है और हर पल कुछ न कुछ ह्रास होता ही है किन्तु जीवन के हर दशक में कुछ न कुछ क्षय होता ही है ,आओ जानें कि वे कौन कौन से गुण हैं ।
प्रथम दशक- बाल्यावस्था हानि- जन्म से 10 वर्ष तक की अवस्था में
द्वितीय दशक- वृद्धि का अवरोध- 10 से 20 साल की उम्र तक पहुँचते पहुँचते
तृतीय दशक- सौंदर्य हानि- 20 से 30 की उम्र होते होते
चतुर्थ दशक- वृद्धि का रुकना- 30 से 40 की उम्र में किसी नये या पुराने अंग का विकास शेष नही रहता है
पंचम दशक- त्वचा मे छुर्रियाँ पड़ना शुरु- 40 से 50 तक एसा अधिकतर शुरु हो चुका होता है।
सप्तम दशक- शुक्र हानि (वीर्य की कमजोरी)- 50 से 60 तक
अष्टम दशक- विक्रम हानि(शक्ति की कमजोरी)- 60 से 70 तक ज्यादातर हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं।
नवम दशक- बुद्धि की हानि – 80से 90 की उम्र में सोचना समझना कमजोर हो जाता है।
दशम दशक- कर्मेन्द्रियों की हानि ( हाथों में कम्पन)- 90 से 100 तक शरीर में कँपकपाहट बन ही जाती है।

नोट- ये सभी लक्षण किसी किसी में समय से पहले किसी किसी में समय से बाद में भी दिखाई दे सकते हैं किन्तु ज्यादातर का आँकड़ा यही रहता है।

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