विदारीकंद का सरल व शरीर को मजबूत व टिकाऊ बना देने वाला वाजीकारक योग - Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Wednesday, October 15, 2014

विदारीकंद का सरल व शरीर को मजबूत व टिकाऊ बना देने वाला वाजीकारक योग



 शीतकाल शुरु होने को है और यही वह समय होता है जवकि खाया पीया ठीक से हजम होने लगता है क्योंकि गर्मियों में तो खाया पीया ही नही जाता है । अतः जिनको अपने शरीर का ख्याल ठीक से रखना होता है वे शीत ऋतु में उचित आहार व विहार से यह कर सकते हैं।इस समय में खाया पीया अगर आपकी पाचन क्रिया दुरुस्त है तो भली भाँति शरीर को लगता है।
वे आयुर्वेदिक योग जो यौन दौर्बल्य व नपुंसकता की स्थिति नही आने देते वाजीकारक योग कहलाते हैं।
वैद्यक चमत्कार चिन्तामणि नामक पुस्तक के अनुसार
सुन्दरि विदारिकायाः सम्यक् स्वरसेन भवति चूर्णम।
सर्पिः क्षौद्रसमेतं लीढ्वा रसिको दशांगना समयेत्।।
अर्थात विदारीकन्द को कूट पीस कर खूब बारीक चूर्ण करके इसे विदारीकन्द के ही रस में भिगो कर सुखा लें इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा में आधा चम्मच देशी घी और घी से तीन गुना यानि कि ढेड़ चम्मच शहद मिला कर चाट लें और ऊपर से एक गिलास मीठा कुनकुना दूध पी लें।इस प्रकार लगातार 60 दिन सेवन करने के उपरान्त यौन दौर्बल्य व नपुंसकता अवस्य ही मिट जाएगी।जो लोग शादी शुदा हैं उनके लिए यह योग नव यौवन प्रदान करने वाला है। यह बहुत ही सस्ता बनाने में सरल व शरीर को मजबूत व टिकाऊ बना देने वाला योग है । 

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