शीत ऋतु विशेषांक-खांसी पर प्रयोग किये जाने बाले योग - Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Saturday, December 29, 2012

शीत ऋतु विशेषांक-खांसी पर प्रयोग किये जाने बाले योग

  • अनार का छिलका,काली मिर्च, मुलहठी, बहेड़ा,पपड़िया कत्था,फुलाया हुआ सुहागा और गुल बनफ्सा 10-10 ग्राम,खाने का चूना 3 ग्राम और देशी पान 50 की संख्या में लेकर सभी सामिग्री को कूट पीस लो और सभी को बबूल की छाल के काढ़े के साथ भिगोकर 1 -1 ग्राम की गोलियाँ बना कर सुखा लों 
मात्रा- सभी प्रकार की खाँसी में 1 -1 गोली ,दिन में 2 -3 बार दे दें।
  • सितोपलादि चूर्ण 3 ग्राम, प्रवाल भस्म,मृगश्रंग भस्म,व सोना माखी की भस्म 1-1 ग्राम की मात्रा में लेकर घोट कर मिला लें 
मात्रा- तुलसी रस व शहद के साथ मिलाकर आधा आधा ग्राम यह दवा दिन में 2-3 बार देने से रोगी को पर्याप्त आराम मिल जाऐगा।यह योग सब प्रकार की खाँसी में लाभदायक है।
  • बृहद पंचमूल( बेल,श्यौनाक,खंभारी,पाढर व अरलू की मूलें) के क्वाथ में पीपल चूर्ण मिलाकर पिलाने से वातजन्य कास में शीघ्र लाभ सम्भब है।
  • भारंगी, कचूर,काकड़ासिंगी, छोटी पीपल,सोंठ और दाख का चूर्ण पुराने गुण व सरसों तेल के साथ सेवन करने से वात जन्य खाँसी दूर हो जाती है।
  • छोटी पीपल, काली मिर्च,मुलहठी,मुनक्का और पिण्ड खजूर का 1 ग्राम चूर्ण असमान मात्रा वाले शहद व देशी घी के साथ चाटने पर पित्तजन्य खाँसी में पूर्णतया आराम मिल जाता है।
  • छोटी पीपल,भारंगी,कचूर,नागरमोथा,जवासा,काकड़ासिंगी व गुड़ का बरावर मात्रा का चूर्ण सरसों के तेल के साथ लेने से भी वातजन्य खाँसी दूर हो जाती है।
  • छोटी पीपल,खील(लाजा),मुनक्का,पिण्डखजूर,और मिश्री सभी बराबर मात्रा लेकर असमान भाग शहद व घी के साथ चाटने से पित्तजन्य खाँसी दूर हो जाती है।
  •  पुस्कर मूल,भारंगी,कायफल,छोटी पीपल, व सौंठ का काड़ा,कफ बाली खाँसी में अति लाभकर है।श्वांस में भी अति लाभकर है।
  • छोटी कटेरी,खिरेंटी,बड़ी कटेरी,अडूसा और मुनक्का के काड़े में मिश्री व शहद मिलाकर पीने से पित्त दोष बाली खाँसी दूर हो जाती है।
  • पंचकोल (पीपल,चव्य,पिपलामूल,चित्रक,व सौंठ) डाल कर उवाला गया दूध कफज खाँसी को दूर करता है।ज्वर तथा श्वांस में भी हितकर है।इससे बल-वर्ण और जठराग्नि में भी वृद्धि होती है।
  • छोटी कटेरी के काड़े में छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की खाँसी दूर हो जाती है।
  • अदरख के स्वरस में शहद मिलाकर पिलाने से छोटे बच्चों के तो खाँसी,श्वांस,जुकाम,तथा कफयुक्त सभी उपद्रव दूर हो जाते हैं।
  • सूखी मूली,चित्रक मूल और छोटी पीपल का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें।इससे कास, श्वांस तथा हिचकी सभी रोग दूर हो जाते हैं।
  • नागर मोथा,छोटी पीपल, मुनक्का,और पके हुये कटेरी के फल लेकर चूर्ण कर लें,और शहद के साथ चाटें तो क्षयजन्य खाँसी भी दूर हो जाती है।

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