मोटापा घटाऐं रचनात्मक रहकर - Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

Ayurveda-A Natural Treatment System developed in India that has been passed on to humans from the God Dhanvantari, themselves who laid out instructions to maintain health as well as fighting illness through therapies, massages, herbal medicines, diet control, and exercise.

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Friday, October 19, 2012

मोटापा घटाऐं रचनात्मक रहकर

हर कोई चाहता है कि वह सुंदर दिखाई दे और सुंदर दिखाई देने के लिए यह जरुरी है कि आपका शरीर  सुंदर व छरहरा हो।औऱ छरहरी काया अगर चाहते हैं तो इसके लिऐ आपको कुछ प्रयास तो करना ही होगा।तो अगर चाहते हैं कि आपकी काया सुंदर व छरहरी हो तो सर्व प्रथम आप अपने खाने पीने पर कंट्रोल करें। अब कंट्रोल का मतलब यह मत समझना कि डायटिंग शुरु करनी है नही डायटिंग करने की जरुरत नही पड़ेगी किन्तु यहाँ बात हो रही है कि आप कम खायें पालथी लगाकर व अच्छा व पौष्टिक खाए।और जितना खाए उसे पचाने के लिए उचित व्यायाम, शारीरिक श्रम का ख्याल रखें।अगर इतना करते रहोगे तो कभी भी डायटिंग की जरुरत नही पड़ेगी।
   मोटापा घटाने के लिए श्रम की बात हो रही है तो कुछ बातों का ध्यान रखें।
जल्दी सोयें व जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में जाग जाऐं।नियमित समय से  फ्रैस हो फिर टहलने जाए ।टहलते समय धीमे धीमे अपनी चाल को तेज करने का प्रयास करें।दोड़ना एक अच्छा व्यायाम है किन्तु उसकी अपेक्षा तेज कदमों से चलना ज्यादा श्रेयस्कर रहेगा।लड़किया अपना स्काईपिंग या रस्सी कूद का खेल जारी रखें तो ज्यादा फायदा मंद है।खेल कूद व व्यायाम का पर्याय भी शारीरिक श्रम कराना ही तो है।अपने घरेलू कार्यों को नौकरों के ऊपर छोड़कर हमें दो नुकसान होते हैं एक तो हमारा काम कभी भी हमारी तरह नही होगा दूसरा जब वह काम करेगा तो हम ठलुआ ही तो बैठेंगे ।और ठलुआ पन मोटापा वृद्धि का सबसे प्रवल फेक्टर है।हमें अपने सभी घरेलू कार्य यथा पौछा लगाना,सफाई करना,कपड़े धोना आदि अपने आप करने  चाहिऐं।इससे शरीर में उत्पन्न फालतू ऊर्जा काम आ जाती है तथा हम स्वस्थ बने रहते है।
बहुत से लोगों की आदत होती है कि् व्यापार,आफिस,या अपना घरेलू कार्य निपटाया और लेट गये विस्तर पर यह एक खराब आदत है।वैसे मैं यह नही कह रहा हूँ कि आप आराम ही न करें लैकिन हमेशा विस्तर पर पड़े रहने से एक तो आलस्य आता है दूसरा पाचन क्रिया शिथिल हो जाती है। खाली समय में कढ़ाई,बुनाई ,पैंटिग,लेखन आदि रचनात्मक कार्य करके आप अपने आप को व्यस्त व शरीर को मस्त रख सकते है।आप जितने ज्यादा रचनात्मक होंगे उतने ही व्यस्त रहैंगे और मस्त भी रहैंगे।आप जानते हैं कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग का निवास होता है।
कुछ लोग एक खतरनाक आदत रखते है कि जैसे भैंस जुगाली करती है वे लोग भी हर समय कुछ न कुछ करते रहते हैं।इससे दो काम खराव होते हैं पहला यह कि हमारे शरीर को बिना जरुरत की कैलोरी मिलती हैं या ऊर्जा खपत से कही ज्यादा पैदा होती है। और शरीर में उसके नियंत्रण की जो व्यवस्था है वह भी जब पूर्ण हो जाती है तो मोटापा बढ़ता है और अत्यधिक मोटापा होने के बाद  यही ऊर्जा  मूत्र मार्ग से बाहर निकलती है या फिर ऱक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ा कर मधुमेह के सिम्टम्स पैदा कर देती है।हर समय भोजन करन का सबसे बढ़ा नुकसान है कि हमारे पाचन के लिए आवश्यक पाचक रस बारबार खाने की आदत से लगातार खर्च होते रहते है अतः कुछ ही दिनों मे उनकी खपत ज्यादा होने से निकलना कम हो जाता है।और मेटावोलिज्म क्रिया कमजोर पड़कर पाचन नही हो पाता फलस्वरुप कच्चा भोजन ही मल द्वार से बाहर निकलता है।
इसके लिए अच्छा रहेगा कि आप अगर पास ही कहीं जा रहे हैं तो पैदल ही जाने की कोशिश करें।इससे व्यायाम तो होगा ही साथ ही कभी मजबूरी में पैदल भी चलना पड़ा तो चल सकेंगे।

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