विजाइनिजमस या वेजुहनिज़मस अथवा योनि का संकुचित होना क्या है? - Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

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Tuesday, October 16, 2012

विजाइनिजमस या वेजुहनिज़मस अथवा योनि का संकुचित होना क्या है?

What is Vaginismus? अथवा यो कहैं कि योनि का तंग या संकुचित होना क्या है ?
विजाइनिसमस या योनि का तंग होना या फिर योनि का अत्यधिक संकुचन होना,मैथुन के समय योनि का इतना ज्यादा संकुचित होने की अवस्था है कि संभोग या तो हो ही नही पाता या फिर होता है तो अत्यधिक दर्द युक्त होता है।लैकिन विजाइनिसमस वह अवस्था है जिसमें संभोग दर्द युक्त होता है।और जब स्थिति इससे ज्यादा खराब यानि की सेक्स न हो सकने की स्थिति बनती है तो उसे एटरेसिया आफ विजाइना कहते हैं। 
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इन रोगों की प्रमुख वजह होती है योनि के आसपास की  दीवारों की माँसपेशियों pelvic floor muscles के तंतुओं  की जकड़न या योनि के भीतर की श्लेश्मिक कला में सूजन या योनि में प्राकृतिक रुप से स्रावित होने वाले द्रवों का कम या विल्कुल उत्पन्न होना।योनि के भीतर या बाहर किसी बड़े घाव के कारण से भी योनि संकुचित हो जाती है।इसमें होता यह है कि योनि की श्लेश्मिक कला शोथ या सूजन युक्त होकर आपस में चिपक जाती है।जिसके कारण योनि मार्ग बंद हो जाता है तथा कभी -2 योनि का बाहरी या भीतरी छिद्र भी बंद हो सकता है।कुछ मामलों मे इस रोग में स्त्री को मैथुन के समय जलन,दर्द या चुभन होती है।और कुछ मामलों में लिंग प्रवेश कठिन ही नही असम्भव भी हो सकता है। वैसे इसके मुख्य कारणों में से एक कारण unconsummated relationships या भावनात्मक संवधो की कमी है।यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जव कि योनि मुख पर ही बिल्कुल बंद होती है और पुरुष अपना लिंग प्रवेश करने में असमर्थ होता है।और मैथुन करने में एक असहनीय दर्द होता है जो मैथुन के समाप्त होने पर ही समाप्त होता है।या यो कहैं कि दर्द की अधिकता के कारण मैथुन क्रिया रोक देनी पड़ती है।
विजाइनिसमस के प्रकार-
A- जब कोई स्त्री किसी भी समय दर्द मुक्त संभोग नही कर पाती तथा कुछ स्त्रियाँ तो प्रारम्भिक अवस्था मे ही इतनी परेशान हो जाती हैं कि मासिक के समय लगाये जाने वाला कपड़ा या पैड भी लगाने में तेज दर्द होता है और इसी कारण से बहुत से गृहस्थ तो निष्णात होकर सम्बन्ध बना ही नही पाते। तो यह प्रारम्भिक योनि संकुचन या योनि तनाव की स्थिति है।.
 इस रोग के सामान्य सिंपटम्स निम्न है।
1-टाइटनेस के साथ जलन या चुभन के साथ दर्द होना।
2- लिंग प्रवेश में कठिनाई या  दर्द युक्त लिंग प्रवेश  लिंग प्रवेश असम्भव होना ।
B-यह रोग अनेको वर्षों के सुखद पारिवारिक या गृहस्थ सम्बन्धो के बाद भी पैदा हो सकता है।इसका कारण कोई सदमा ,चिकत्सकीय परिस्थिति,बच्चे का जन्म अथवा कोई सर्जरी या मेनोपोज की स्थिति भी हो सकती है।यह सैकेण्डरी विजाइनिजमस कहलाता है।
नीचे चित्र में स्थितियाँ दिखाई गई हैं।
उपचार-अगर रोग का कारण सदमा है तो पहले सदमे का कारण जानकर उसे समाप्त करने का प्रयास करना चाहिये।
1-योनि संकुचन का कारण यदि योनि  कपाट के ओष्ठों की श्लेश्मिक कला के चिपकने के कारण है तो इसका एक मात्र उपाय तो केवल सर्जरी ही है।
2-यदि योनि की मांसपैशियों में ऐंठन के कारण ऐसा है तो ग्लेसरीन या अच्छी वैसलीन साफ रुई में पूरी तरह योनि में रखनी चाहिये।संभोग के समय शिश्न पर नारियल का तेल लगाकर मैथुन करें।भोजन में घी तथा पौष्टिक पदार्थ ज्यादा से ज्यादा लें।
3- अच्छा और सरल यह उपाय है कि एरण्ड तेल में रुई भिगोकर योनि में रखें भगवान करेगा तो कष्ट अवश्य मिट जाएगा ।
4-घीकुआर का या एलोयवेरा का गूदा,सोठ व इण्द्रायण की जड़ समान मात्रा में लेकर वारीक पीस कर बकरी के दुध के घी में मिलाकर योनि की दीवारों पर लेप करने  से योनि संकुचन दुर होगा।
5- पुनर्नवा का पोधा अपने आप में अनेकों औषधीय गुण रखता है इस पौधे की ताजा जड़ व पत्तो का रस निकाल कर रुई के फाहै में भिगोकर योनि में रखने से मैथुन की समस्या का विनाश हो जाता है।



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