हल्दी है इन दो जानलेवा बीमारियों की गजब की दवा - Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

Breaking

Ayurveda : A Holistic approach to Health, age and Longevity

Ayurveda-A Natural Treatment

Ancient Natural Traditional Science

WWW.AYURVEDLIGHT.COM

Monday, October 15, 2012

हल्दी है इन दो जानलेवा बीमारियों की गजब की दवा

यह लेख मैने साभार श्री रणधीर चौधरी पानीपतिया के फेसबुक एकाउण्ट से ली है।
_____________________________________________
हल्दी के गुणों से तो हम और आप तो वर्षों से परिचित रहे हैं और दुनिया के वैज्ञानिक भी इसके नए- नए गुणों के पन्ने जोड़ते चले जा रहे हैं।

 अब हाल के ही एक शोध को ले लीजिये ,हल्दी मैं पाए जानेवाले तत्व कुर्कुमिन को कैंसर को फैलानेवाली अवस्था जिसे मेटास्टेसिस के नाम से जाना जाता है ,इसे रोकने में मददगार पाया गया है। पश्चिमी देशों में प्रोस्टेट कैंसर सबसे खतरनाक माना जाता रहा है और अधिकांश में इसका पता तब चलता है ,जब इसका ट्यूमर शरीर के कई अंगों में फैल चुका होता है। तीन प्रतिशत रोगियों में यह फैलाव घातक होता है। म्यूनिक स्थित एल.एम् .यू.के डॉ बेट्रिक बेक्मिरर की मानें तो हल्दी के सकिय तत्व करक्यूमिन को मेटास्टेसिसरोधी गुणों से युक्त पाया गया है। इन वैज्ञानिकों की टीम ने करक्यूमिन को कैंसर से बचाव सहित दूसरे अंगों में फैलने से रोकने वाले गुणों से युक्त पाया गया है। इससे पूर्व भी इन्हें वैज्ञानिकों ने करक्यूमिन को फेफेड़ों और स्तन के मेटास्टेसिस को रोकने वाले गुणों से युक्त पाया था,वैज्ञानिकों ने करक्यूमिन में कैंसर के फैलने के लिए जिम्मेदार दो प्रोटीन के निर्माण को कम कर देने वाले गुणों से युक्त पाया है।

करक्यूमिन के इस प्रभाव के कारण ट्यूमर कोशिकाएं कम मात्रा में साइटोकाईनिन को पैदा कर पाती हैं,जो मूलत: कैंसर के फैलाव यानी मेटास्टेसिस के लिए जिम्मेदार होता है। डॉ.बेक्मिरर का तो यहाँ तक कहना है की हल्दी में पाया जानेवाला तत्व करक्यूमिन केवल कैंसर के फैलाव को ही कम नहीं करता है ,अपितु इसके नियमित सेवन से स्तन और प्रोस्टेट के कैंसर से भी बचा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने प्रतिदिन आठ ग्राम तक करक्यूमिन की मात्रा को मानव शरीर के लिए सुरक्षित माना है। हल्दी के गुणों का आयुर्वेद के जानकार सदियों से चिकित्सा में प्रयोग कराते आ रहे हैं । भारतीय व्यंजन हल्दी के श्रृंगार के बगैर अधूरी ही मानी गई है। वैज्ञानिकों का यह मानना है की बी.एच .पी .(बीनाइन प्रोस्टेटिक हायपरप्लेसीया ) एवं महिलाएं जिनका पारिवारिक स्तन कैंसर का इतिहास रहा हो उनमें करक्यूमिन का सेवन कैंसर से बचाव की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।
.

No comments:

Post a Comment

OUR AIM

ध्यान दें-

हमारा उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व में आय़ुर्वेद सम्बंधी ज्ञान को फैलाना है।हम औषधियों व अन्य चिकित्सा पद्धतियों के बारे मे जानकारियां देने में पूर्ण सावधानी वरतते हैं, फिर भी पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी औषधि या पद्धति का प्रयोग किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही करें। सम्पादक या प्रकाशक किसी भी इलाज, पद्धति या लेख के वारे में उत्तरदायी नही हैं।
हम अपने सभी पाठकों से आशा करते हैं कि अगर उनके पास भी आयुर्वेद से जुङी कोई जानकारी है तो आयुर्वेद के प्रकाश को दुनिया के सामने लाने के लिए कम्प्युटर पर वैठें तथा लिख भेजे हमें हमारे पास और यह आपके अपने नाम से ही प्रकाशित किया जाएगा।
जो लेख आपको अच्छा लगे उस पर
कृपया टिप्पणी करना न भूलें आपकी टिप्पणी हमें प्रोत्साहित करने वाली होनी चाहिए।जिससे हम और अच्छा लिख पाऐंगे।