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Saturday, October 29, 2016

डायबिटीज या मधुमेह रोग कारण,निवारण व घरेलू उपचार Diabetes,madhumeh ka gharelu ilaaj

आयुर्वेदिक मतानुसार डायविटीज या मधुमेह अथवा प्रमेह रोग का कारण व उपचार------

डायबिटीज आज के समय में एक ऐसा रोग बन गया है जिससे लगभग समस्त मानवता पीड़ित है डाय-बिटीज इस समय का ऐसा रोग बन गया है कि जिससे हर कोई डरता है किन्तु इस रोग की जड़ का कारण अगर हैरेडिटीकल आनुवांशिक नही है तो खुद व्यक्ति ही इसे पैदा करने का कारण है क्योंकि अपनी दिनचर्या के कारण ही ज्यादातर लोगों को डायबिटीज होती है।
Diabetes,madhumeh ka gharelu ilaaj
डायबिटीज , मधुमेह या प्रमेह रोग कारण व निवारण तथा उपचार 
आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर अपने प्राकृतिक रुप में प्रत्येक प्रकार के स्रावों को आपकी जरुरत के अनुसार स्रावित करता है किन्तु अगर आपने अपनी दिनचर्या विगाड़ ली है तभी किसी प्रकार की समस्या पैदा होती है डायबिटीज भी ऐसा ही रोग है जब कि आप शरीर की जरुरत से ज्यादा कैलोरी उसे देते रहते हैं और उस भोजन से बनी कैलोरीज़ को नष्ट करने का प्रयास नही करते है वैसे प्राकृतिक अवस्था में शरीर ने व्यवस्था की हुयी है कि यदि अतिरिक्त कैलोरीज़ शरीर में पैदा हो जाऐ तो वह आपके अग्न्याशय अर्थात पैंक्रियाज़ में स्रावित होने वाली इन्सुलिन के द्वारा नष्ट कर दिया जाऐ लैकिन यह स्थिति तभी तक है जब तक कि आप पर्याप्त रुप से शारीरिक श्रम भी कर रहे हैं और उसके बावजूद कुछ ग्लूकोज़ आपके शरीर में अतिरिक्त रह जाऐ तो इन्सुलिन इसे नष्ट कर दे किन्तु यदि आप शारीरिक श्रम जब विल्कुल भी नही करते और शरीर को पर्याप्त से ज्यादा भोजन मिलता रहता है तब बहुत ज्यादा ग्लूकोज़ पैदा होता है जिससे शरीर में बना इंसुलिन इसे उदासीन करने के लिए काफी नही होता है और रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ती चली जाती है। और इसके कारण शरीर आपको निम्न लक्षण दिखाना शुरू कर देता है तो एक प्रकार से अगर आपको निम्न लक्षण दिखाई देने लगें तो आपको सावधान हो जाना चाहिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है जब आपका अग्न्याशय या पैंक्रियाज की आइसलेट सेल्स (islet cells) शरीर में पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पातीं, तो टाइप- 1 डायबिटीज की स्थिति पैदा होती है; यह एक तरह का ऑटो इम्यून (auto immune) रोग है, जो इन अंगों को काम करने नहीं देता। 
टाइप- 2 डायबिटीज ज्यादातर जीवन-शैली (कम एक्सरसाइज और खाने में शुगर ज्यादा लेने) से जुड़ी होती है।
आइये कैसे जाने कि  डायबिटीज हो तो नहीगयी है---
टाइप- 1 और टाइप- 2 डायबिटीज के सामान्य लक्षणों में ये बातें शामिल हैं।
टाइप-1 डायबिटीज अगर किसी को है तो वह उसके जन्म के साथ भी हो सकती है अर्थात हैरेडिटिकली भी हो सकती है। और यह बचपन से ही उसके साथ रहती है।
ज्यादा वजन वाले या मोटापे के शिकार लोग, या जो जरूरत से ज्यादा मीठा और परिष्कृत या रिफाइंड कार्बोहायड्रेट (refined carbohydrates) खाते हैं, उनमें टाइप- 2 डायबिटीज की संभावना ज्यादा रहती है।
  • बहुत ज्यादा प्यास लगना
  • बहुत ज्यादा  भूख लगना
  • आपकों धुँधला दिखाई दे    
  • जब रात में आपको 3 बार या उससे ज्यादा बार मूत्र त्याग के लिए उठना पड़े।
  • थकान महसूस हो  (खासकर खाना खाने के बाद)
  • मन में चिड़चिड़ापन रहे 
  • शरीर में किसी प्रकार का घाव होने पर वह भर न रहा हो या धीरे-धीरे भरें।
अगर आपको लगता है कि आप मधुमेह या डायबिटीज के शिकार हैं, तो तुरंत एक स्पेशलिस्ट से संपर्क कीजिए। डायबिटीज के लक्षणों और संकेतों, और इसकी जाँच-पड़ताल के बारे में जानना जरूरी है, ताकि अगर आप इससे पीड़ित हों, तो जितनी जल्दी हो सके, इलाज शुरू किया जा सके।

यह जानने के लिए किआपको डायबिटीज है या नहीं, आपको किसी डॉक्टर की देखरेख में डायबिटीज की जाँच या ब्लड टेस्ट करवाना होगा।तबआपके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट से पता लगेगा कि आपका ब्लड शुगर का लेवल "सामान्य" हैं,या "प्री-डायबिटिक (pre-diabetic)" अर्थात अगर आपने अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदली तो जल्द ही आपमें डायबिटीज या मधुमेह होने का ख़तरा है या आप "डायबिटीज या मधुमेह " की स्थिति में हैं।
  • आपको मधुमेह या डायबिटीज है या नहीं, इसकी पहिचान जितनी जल्दी हो जाए ठीक है, क्योंकि अगर आपको यह हो ही गयी हो, तो तुरंत इसका इलाज शुरू हो सके।
  • डायबिटीज की वजह से होने वाला शारीरिक नुकसान अक्सर “अनियंत्रित ब्लड शुगर (uncontrolled blood sugars)” से होने वाला दीर्घकालीन नुकसान होता है। अर्थात अगर आप इलाज कराते हैं और इससे आपकी ब्लड शुगर कुछ हद तक कम होती है, तो आप डायबिटीज अर्थात मधुमेह के दीर्घकालीन नुकसान से बच सकते हैं या कुछ हद तक उसे “टाल” सकते हैं। इसी वजह से बीमारी तुरंत निदान और इलाज ही आपके स्वास्थ्य की मूल कुंजी है।

आयुर्वेदानुसार मधुमेह या डायबिटीज प्रमेह ही है।
माधव निदान नामक निदान ग्रंथ ने मधुमेह को प्रमेह का ही एक रुप माना है जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाने पर यह पहले मूत्र मार्ग से ही निकलती है ।

डायबिटीज का आयुर्वेदिक इलाज---

निम्न श्लोक में आयुर्वेदिक मतानुसार मधुमेह का इलाज बताया गया है कृपया ध्यान से इस श्लोक को पढ़े।
दार्वी सुराह्वां त्रिफला समुस्तां कषायमुत्क्वाथ्य पिबेत प्रमेही !

क्षोद्रेंण युक्तामथ्वा हरिद्रा पिबेद्र्सेनामलकीफलानाम !!



  1. दारुहरिद्रा (Berberis sp.)
  2. देवदारु ( Cedrus.deodara )
  3. आंवला (Emblica officinalis)
  4. हरड़(Terminalia Chebula)
  5. बहेड़ा (Terminalia belerica)
  6. नागरमोथा (Cyperus rotundus) 
इन 6 द्रव्यों को  समान मात्रा में लेकर विधि पूर्वक काढ़ा बना लें और प्रमेह अर्थात मधुमेह या डायबिटीज से पीड़ित रोगी को पिलायें
इस प्रयोग से निश्चित ही रक्तगत शर्करा नियंत्रित होगी ।

डायबिटीज या शुगर, मधुमेह
 का आयुर्वेदिक व घरेलू उपचार-------

1- आंवले के ताजे फल के रस में हरिद्रा का पाउडर एवं मधु मिलाकर पिलाना भी लाभकारी है।
2- जामुन की चार-पांच पत्तियां सुबह एवं शाम को खाकर चार-पांच रोज पश्चात शुगर टेस्ट करवायें । आशा से अधिक वांछित परिणाम आयेगें ।
3- नीम की सात -आठ हरी मुलायम पत्तियां सुबह हर रोज खाली पेट चबाकर उसका रस निगल जाये, ऐसा नियमित करते रहने से शुगर पर नियन्त्रण बना रहता है,एवं दस-पन्द्रह दिन तक यह प्रयोग करने के बाद आप जरूरत के अनुसार मीठी चाय और मीठा भोजन भी ले सकते हैं । शुगर आपका कोई भी नुकसान नहीं कर सकती है ।
पत्तियां चबाने के पांच से दस मिनट के बाद हल्का या पेट भर नाश्ता अवश्य लें अन्यथा हानि होने की प्रबल संभावना रहती है ।
4- मेथीदाने के दरदरे पीसे हुए चुर्ण को 20 ग्राम से 50 ग्राम लेकर सुबह-शाम खाना खाने से  15-20 मिनट पहले फंकी लेते रहने से मूत्र व खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है । इस योग को आवश्यकतानुसार तीन से चार सप्ताह तक लें । 
गर्म प्रकृति वाले विशेष ध्यान दे । गर्म प्रकृति वाले इसे मट्ठे या छाछ के साथ ले । अनुकूल होने पर मात्रा 70 से 80 ग्राम दोनो बार की मिलाकर ले सकते हैं । यह हानि रहित है ।
जिन रोगियों को बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, घाव धीरे-धीरे भरना ऐसे लक्षण हो उन रोगियों को वजन घटाना चाहिये, अगर उनका वजन उँचाई के हिसाब से अधिक हो तो हर दस-पन्द्रह दिनों में शुगर की जांच करवाते रहे । सामान्य वजन वाले नहीं । वैसे रोगी को स्वयं ही इसका अनुभव होने लगेगा । 
 जिन व्यक्तियों को गर्म तासीर के पदार्थ माफिक नही आते ऐसे  रोगियों के लिए रात्रि में मेथीदाना भिगोकर और सुबह-शाम निथार कर उसका जल पीना अति उतम रहेगा । विशेष कर सभी रोगियों के लिए गर्मियों में भीगा हुआ मेथीदाना फेंकने के बजाय खा लेनेे से विशेष लाभ होता है ।
 शुगर की बीमारी का इलाज---
5- गेहुं का आटा छानने के बाद जो चोकर बच जाता है उसे 20 ग्राम लेकर उसमे पानी मिलाकर आटे की तरह      गूँथ कर उसकी पेड़े की तरह टिकिया बना ले । उस टिकिया को तवे पर भून ले और प्रातःकाल खाली पेट इसका  6 महिने तक सेवन करें । आपको शुगर से मुक्ति मिल जाऐगी।
6- गेहु के आटे को लोेहे की कड़ाही में  भूरा होने तक भूने तथा उसमे दो या तीन चम्मच मूँगफली या सरसों का तेल मिलाकर उस आटे की रोटी बनाकर खायें । ऐसा करने से इन्सुलिन की जरूरत नहीं रहेगी और न ही मधुमेह का खतरा रहेगा ।
7- गेहुं के 5 kg आटा लेकर उसमें 1/2 kg जौ, 1/2 kg चना देशी, 1/4 kg मेथीदाना मिलाकर तथा लोहे की कड़ाही में भूनकर इसकी रोटी वही मूँगफली या सरसों का तेल मिलाकर बनाऐं तथा बताये इस प्रकार मधुमेह रोगी इस बीमारी से निजात पा सकता है।
विशेषः- आटे मे मोयन के लिए सिर्फ-मुंगफली तेल, सरसों तेल या जैतुन का तेल ही प्रयोग में लायें । सोयाबीन, सुरजमुखी या सफोला जैसे तेल का उपयोग नहीं करें ।
8- अमरूद के एक या दो स्वच्छ किटाणु रहित पत्तों को थोड़ा कूटकर रात्रि को कांच के गिलास में (पात्र धातु का न हो) या चीनी मिट्टी के प्याले में भिगोकर सुबह खाली पेट पीने से एक माह में ही अनुकूल परिणाम नजर आयेगें । दवा की जरूरत नहीं रहेगी ।
9- नियमित रूप से तुलसी की दो से चार पत्तियां लेते रहने से रक्त शर्करा में अवश्य ही फायदा होगा साथ में तुलसी अन्य कई बीमारियों में भी विशेष फायदा प्रदान करेगी और अल्सर वाले मरीजों को विशेष फायदा होगा 

10- सुर्य-किरण चिकित्सा द्वारा तैयार किया हुआ पानी प्रयोग में लाकर रोगी शुगर की बीमारी से हमेशा के लिये निजात पा सकता है। इसमें केवल आपकी आस्था और विश्वास की जरूरत है।
विशेषः- शुगर के रोगी अगर कपालभाति प्राणायाम 15 मिनट एवं मण्डुकासन 7 - 8 बार करें तो शुगर नियमित हो जाती है एवं उपरोक्त किसी एक विधि को करने के बाद निश्चित ही रोग सही हो जाऐगा।
लैकिन कोई भी योग का प्रयोग करने से पहले चिकित्सक या वैद्य का परामर्श लेना अतिआवश्यक है।

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