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Sunday, January 27, 2013

संस्कारित बच्चों को समर्पित कविता

आज की पोस्ट समर्पित है उन बच्चों को जो संस्कारी है जिन्हैं अपने जीवन में संस्कार मिले हैं ऐसे बच्चे को समर्पित है यह कविता इसका रसा स्वादन कीजिऐं
श्री मती मोनिका शर्मा तथा उनके बेटे चिरंजीव चैतन्य के साथ अन्य सस्कारित बच्चों को  समर्पित
 संस्कारित बच्चे के प्रति
संस्कृति की एसी अमिट छाप
जो बच्चा माँ से पाता है
सच कहता हूँ प्यारे वेटे
जग सफल वही बन जाता है
बस रखते रहिये याद सदा
अपनी माता की बातों को
फिर पाओगे तुम जहाँ नया
काटोगें तम को आतप को
चैतन्य नाम पाया तुमने
चैतन्य करो जगती को तुम
भर दो फिर से तुम जगती में
नव श्वास संस्कृति की तुम
तुमको आशीष मेरा प्रिय वर
तुमको शुभकामनाऐं मेरी
मकर संक्रान्ति व गणतंत्र दिवस
अभिनन्दन संग आशा मेरी
तुम पढ़ो लिखो गुण वान बनो
तुम भर दो जग में गरिमा भू की
तुम कुछ फिर एसा काम करो
लौटे गरिमा भारत भू की
तुम्हारी आश करे भारत
माताऐं आश करे तेरी
तुमसे माता का नाम वढ़े
होवें माँ की आशा पूरी
जो मात तुम्हारी साध रही
होवे साधना वह तब पूरी

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