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Thursday, November 1, 2012

अब लो कब्ज दूर करने बाला नया योग -पंच कोल चूर्ण

आयुर्वेद शास्त्र मानव के हित में उपलब्ध आज तक के सम्पूर्ण चिकित्सा शास्त्र में ऐसा साहित्य प्रदान करता है जिसका उद्देश्य रोग पीढ़ित मानव ही नही सम्पूर्ण जीव जगत को आरोग्य प्रदान करना है।और जिसका कोई भी साइड इफेक्ट नही है।आज मैं लाया हू एसा योग जो ऐसे रोग का विनाश करता है जिसने सबसे ज्यादा मानवों पीड़ित किया हुआ है।और उस रोग का नाम है कब्ज
अनीयमित आहार विहार व अनीयमित दिनचर्या से होने वाला रोग कब्ज जिसे आयुर्वेद में विबन्ध भी कहा जाता है।  इस रोग में आहार विहार की अनीयमितता से व्यक्ति की पाचन् क्रिया प्रभावित होती है।इस रोग को दुर करने के लिए आहार विहार सही करके पंचकोल चूर्ण प्रयोग करने से रोग सही हो जाता है।
                 पंचकोल चूर्ण से  अफारा,पेट फूलना,प्लीहा वृद्धि,गुल्म,पेट दर्द,आदि पेट के रोग नष्ट हो जाते हैं।यह पाचन क्रिया दुरुस्त करने वाला ,जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाला तथा रुचिकारक है।श्वांस,खांसी,व वुखार आदि रोगों में भी इसका सेवन किया जा सकता है।
पंच कोल चूर्ण बनाने की सामिग्री- चव्य,चित्रकमूल छाल,सोंठ,पीपल,पिपलामूल सभी समान मात्रा 
निर्माण विधि-   इसे बनाने की विधि भी बहुत सरल है कोई भी बना सकता है।सभी सामानों को वारीक पीस लें तथा साफ शीशे की वोतल  में भर कर रख लें।
सेवन विधिः- इसे आप साधारण तया तो गुनगुने पानी से आधा चम्मच की मात्रा दिन में 3 बार  ले सकते हैं।और इसके अलाबा रोग की अवस्था नुसार आधा चम्मच मात्रा तीन बार शहद से भी लिय़ा जा सकती है।

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